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राधा और सचिन की शादी की कहानी

By Radha Sachin • Published on 02 January 2026 • 57 views
नमस्ते, मैं राधा की मौसी बोल रही हूँ। हमारा गाँव है उत्तर प्रदेश का छोटा-सा गाँव रामपुर, जहाँ खेतों की हरियाली और नदी का किनारा हमारी जिंदगी का हिस्सा है। राधा हमारी लाड़ली है – गोरी-चिट्टी, बड़ी-बड़ी आँखें, हमेशा मुस्कुराती रहती है। गाँव की स्कूल में पढ़ी, फिर कॉलेज तक गई, लेकिन दिल उसका सादगी में ही बसता है। वह घर का सारा काम संभालती, गायों को चारा देती, शाम को मंदिर जाती और कभी-कभी खेत में माँ-बाप की मदद भी कर लेती।
सचिन से रिश्ता कैसे आया, यह तो भगवान की मेहरबानी थी। हमारे एक दूर के रिश्तेदार दिल्ली में रहते हैं, वहीं सचिन के परिवार से उनकी जान-पहचान थी। सचिन बेंगलुरु में एक बड़ी आईटी कंपनी में काम करता है। पढ़ा-लिखा, अच्छी नौकरी, संस्कारी लड़का। जब फोटो आई तो हम सबने देखा – स्मार्ट, साफ-सुथरा चेहरा, मुस्कान में आत्मविश्वास। राधा ने जब फोटो देखी तो शरमाकर आँखें नीची कर लीं, लेकिन मुस्कुराहट छुपा नहीं पाई।
पहली मुलाकात गाँव में ही हुई। सचिन अपने मम्मी-पापा के साथ आया। शहर का लड़का, लेकिन पैर छूकर आशीर्वाद लिया, सबके साथ बड़े अदब से बात की। राधा चाय लेकर आई, तो उसकी नजरें झुकी थीं, लेकिन सचिन ने इतने प्यार से कहा, “राधा जी, चाय बहुत अच्छी बनी है।” बस, उसी पल से दिल मिल गए।
रिश्ता पक्का होने के बाद तैयारी शुरू हो गई। हम गाँव वाले थे, शादी भी गाँव में ही करनी थी। सचिन ने कहा, “जैसी आपकी इच्छा, मैं तो राधा के साथ खुश हूँ।” लेकिन हमने सोचा कि दोनों परिवारों की खुशी के लिए थोड़ा शहरी टच भी दे दें।
शादी का दिन था 15 दिसंबर का। ठंडी सुबह, गाँव की हवा में खुशबू। हमने घर के आँगन में मंडप सजाया – आम के पत्तों से, गेंदे के फूलों से। राधा की दुल्हन की साड़ी लाल-गुलाबी बनारसी थी, जिसे हमने महीनों पहले बनवाया था। जब वह तैयार होकर आई तो लगा जैसे लक्ष्मी जी खुद चलकर आ रही हों। आँखों में काजल, माथे पर बड़ा-सा बिंदी, हाथों में मेहंदी की गहरी छाप – सब देखते रह गए।
बारात आई तो गाँव में जैसे उत्सव छा गया। सचिन घोड़ी पर था – शेरवानी में इतना हैंडसम लग रहा था कि राधा की सहेलियाँ चुपके-चुपके तारीफ कर रही थीं। जयमाला के समय राधा को हमने ऊपर उठाया, सचिन को नीचे – गाँव की रस्म निभाई, सब हँसते रहे। फिर फेरे हुए। राधा ने हर फेरे में सचिन का हाथ थामा और मन ही मन वादा किया कि शहर जाएगी तो भी अपने गाँव की सादगी नहीं छोड़ेगी। सचिन ने भी कन्यादान के समय माँ-बाप के पैर छुए और वादा किया कि राधा को कभी कमी नहीं होने देगा।
विदाई का समय सबसे मुश्किल था। राधा रोते-रोते माँ से लिपट गई। हम सबकी आँखें भर आईं। लेकिन सचिन ने बड़े प्यार से उसका हाथ थामा और कहा, “अब तुम्हारा घर भी मेरा घर है। गाँव आया करूँगा, खेतों में घूमा करूँगा।” राधा मुस्कुरा दी।
अब राधा बेंगलुरु में है। सचिन के साथ फ्लैट में रहती है। कभी-कभी फोन पर बताती है कि ऑफिस के बाद सचिन उसे किचन में मदद करता है, वीकेंड पर दोनों गाँव आ जाते हैं। हम खुश हैं कि हमारी गाँव की राधा को ऐसा प्यार करने वाला शहर का लड़का मिला।
भगवान करे, दोनों की जोड़ी सदा सलामत रहे।
जय श्री कृष्ण!

Reader Comments

Madhu • 02 Jan 2026
Esa hota hai to achha lagta hai

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